"श्री गुरु गौरांगौ जयतः"
"ॐ श्री परमात्मने नमः"
अथ प्रथमो अध्यायः
अध्याय-१
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नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नारोत्तमम्।
देवी सरस्वतीं व्यासं ततो जयमुदीरयेत्॥
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"ॐ श्री परमात्मने नमः"
अथ प्रथमो अध्यायः
अध्याय-१
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नारायणं नमस्कृत्य नरं चैव नारोत्तमम्।
देवी सरस्वतीं व्यासं ततो जयमुदीरयेत्॥
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Chapter-1-Brief-Glance (संक्षिप्त सारांश)
धृतराष्ट्र उवाच
Verses-1 (धर्मक्षेत्रे.......संजय) श्लोक-१
संजय उवाच
Verse-2 (दृष्टवा.......वचनमब्रवीत॒ ) श्लोक-२
Verse-3 (पश्यैतां.......धीमता) श्लोक-३
Verse-4 (अत्र शूरा .......महारथः) श्लोक-४
Verse-5 (धृष्ट केतुश्चेकितानः.......नरपुङग्वः) श्लोक-५
धृतराष्ट्र उवाच
Verses-1 (धर्मक्षेत्रे.......संजय) श्लोक-१
संजय उवाच
Verse-2 (दृष्टवा.......वचनमब्रवीत॒ ) श्लोक-२
Verse-3 (पश्यैतां.......धीमता) श्लोक-३
Verse-4 (अत्र शूरा .......महारथः) श्लोक-४
Verse-5 (धृष्ट केतुश्चेकितानः.......नरपुङग्वः) श्लोक-५
Verse-8 (भवान्भीष्मश्च.......सौमदत्तिस्तथैव च) श्लोक-८
Verse-9 (अन्ये च.......युद्धविशारदाः) श्लोक-९
Verse- 10 (अपर्याप्तं.......भीमाभिरक्षितम्) श्लोक-१०
Verse-11 (अयनेषु च.......सर्व एव हि) श्लोक-११
Verse-9 (अन्ये च.......युद्धविशारदाः) श्लोक-९
Verse- 10 (अपर्याप्तं.......भीमाभिरक्षितम्) श्लोक-१०
Verse-11 (अयनेषु च.......सर्व एव हि) श्लोक-११
Verse-16 (अनन्तविजयं राजा.......सुघोषमणिपुष्पकौ ) श्लोक-१६
Verse-17 (काश्यश्च.......सात्यकिश्चापराजितः) श्लोक-१७
Verse-18 (द्रुपदो....... पृथक्पृथक) श्लोक-१८
Verse-19 (स घोषो....... व्यनुनादयन॒) श्लोक-१९
Verse-20-21 (अथ....... पाण्डवः,हृषीकेशं .......मेऽच्युत) श्लोक-२०-२१
Verse-17 (काश्यश्च.......सात्यकिश्चापराजितः) श्लोक-१७
Verse-18 (द्रुपदो....... पृथक्पृथक) श्लोक-१८
Verse-19 (स घोषो....... व्यनुनादयन॒) श्लोक-१९
Verse-20-21 (अथ....... पाण्डवः,हृषीकेशं .......मेऽच्युत) श्लोक-२०-२१
Verse-21-22(सेनयोरुभयोर्मध्ये.......मेऽच्युत,
यावदेतान्निरीक्षेऽह....योद्धुव्यमस्मिन्रणसमुद्धम ) श्लोक-२१-२२
यावदेतान्निरीक्षेऽह....योद्धुव्यमस्मिन्रणसमुद्धम ) श्लोक-२१-२२
Verse-23 (योत्स्यमानानवेक्षेऽहं.......प्रियचिकीर्षवः) श्लोक-२३
संजय उवाच
Verse-24-25 (एवमुक्तो.......राथोत्तमम्,
भीष्मद्रोणप्रमुखतः...पश्यैतान्समवेतान्कुरुनीति) श्लोक-२४-२५
Verse-26 (तत्रा पश्यत्स्थितान्पार्थः...सेनयोरुभयोरपि।) श्लोक-२६
Verse-27 (तान्समीक्ष्य स ...विषीदन्निदमब्रवीत्।) श्लोक-२७
अर्जुन उवाच
Verse-28 (दृष्टेमं स्वजनं...परिशुष्यति) श्लोक- २८
Verse-29 (वेपथुश्च शरीरे...परिदह्यते।) श्लोक-२९
Verse-30 (गाण्डीव....च मे मनः) श्लोक-३०
Verse-31 (निमित्तानि च....स्वजनमाहवे)श्लोक-३१
Verse-32 (न कान्ग्क्षे.....भोगैर्जीवितेन वा)श्लोक-३२
Verse-33 (येषामर्थे.....धनानि च)श्लोक-३३
Verse-34 (आचार्याः...सम्बन्धिनस्तथा)श्लोक-३४
Verse-35 (एतान्न......नु महीकृते)श्लोक-३५
Verse-36 (निहत्य...पापमेवाश्रयेदस्मान्ह्त्वैतानाततायिनः)श्लोक-३६
Verse-37(तस्मान्नार्हा वयं...स्याम माधव)श्लोक-३७
Verse-38(यद्यप्येते न...च पातकम्)श्लोक-३८
Verse-39 (कथं न...प्रपश्यद्भिर्जनार्दन)श्लोक-३९
Verse-40 (कुलक्षये...कृत्स्नमधर्मोऽभिभवत्युत)श्लोक-४०
Verse-41 (अधर्माभिभवात्कृष्ण...वर्णसंकरः)श्लोक-४१
Verse-42 (संकरो...लुप्तपिण्डोदकक्रिया)श्लोक-४२
Verse-43 (दोषैरेतैः...शाश्वताः)श्लोक-४३
Verse-44 (उत्सन्नकुल्धार्मानां...भवतीत्यनुशुश्रुम)श्लोक-४४
Verse-45 (अहो बत...स्वजनमुद्यताः)श्लोक-४५
Verse-46 (यदि...क्षेमतरं भवेत्)श्लोक-४६
संजय उवाच
Verse-47 संजय-उवाच(एवमुक्त्वार्जुनः...शोकसंविग्नमानसः)श्लोक-४७
Chapter-1-{Summary of events} {अध्याय-१(के अवतरण-चिन्हों का सार-संक्षेप)}
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Brief glance-Chapter-1(संक्षिप्त सारांश)
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VERSES
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(11) (12) (13) (14) (15) (16) (17) (18) (19) (20-
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संजय उवाच
Verse-24-25 (एवमुक्तो.......राथोत्तमम्,
भीष्मद्रोणप्रमुखतः...पश्यैतान्समवेतान्कुरुनीति) श्लोक-२४-२५
Verse-26 (तत्रा पश्यत्स्थितान्पार्थः...सेनयोरुभयोरपि।) श्लोक-२६
Verse-27 (तान्समीक्ष्य स ...विषीदन्निदमब्रवीत्।) श्लोक-२७
अर्जुन उवाच
Verse-28 (दृष्टेमं स्वजनं...परिशुष्यति) श्लोक- २८
Verse-29 (वेपथुश्च शरीरे...परिदह्यते।) श्लोक-२९
Verse-30 (गाण्डीव....च मे मनः) श्लोक-३०
Verse-31 (निमित्तानि च....स्वजनमाहवे)श्लोक-३१
Verse-32 (न कान्ग्क्षे.....भोगैर्जीवितेन वा)श्लोक-३२
Verse-33 (येषामर्थे.....धनानि च)श्लोक-३३
Verse-34 (आचार्याः...सम्बन्धिनस्तथा)श्लोक-३४
Verse-35 (एतान्न......नु महीकृते)श्लोक-३५
Verse-36 (निहत्य...पापमेवाश्रयेदस्मान्ह्त्वैतानाततायिनः)श्लोक-३६
Verse-37(तस्मान्नार्हा वयं...स्याम माधव)श्लोक-३७
Verse-38(यद्यप्येते न...च पातकम्)श्लोक-३८
Verse-39 (कथं न...प्रपश्यद्भिर्जनार्दन)श्लोक-३९
Verse-40 (कुलक्षये...कृत्स्नमधर्मोऽभिभवत्युत)श्लोक-४०
Verse-41 (अधर्माभिभवात्कृष्ण...वर्णसंकरः)श्लोक-४१
Verse-42 (संकरो...लुप्तपिण्डोदकक्रिया)श्लोक-४२
Verse-43 (दोषैरेतैः...शाश्वताः)श्लोक-४३
Verse-44 (उत्सन्नकुल्धार्मानां...भवतीत्यनुशुश्रुम)श्लोक-४४
Verse-45 (अहो बत...स्वजनमुद्यताः)श्लोक-४५
Verse-46 (यदि...क्षेमतरं भवेत्)श्लोक-४६
संजय उवाच
Verse-47 संजय-उवाच(एवमुक्त्वार्जुनः...शोकसंविग्नमानसः)श्लोक-४७
Chapter-1-{Summary of events} {अध्याय-१(के अवतरण-चिन्हों का सार-संक्षेप)}
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